प्रवेश वर्मा के खिलाफ NCR दर्ज, जानिए… यह FIR से कितना होता है अलग?

 प्रवेश वर्मा के खिलाफ NCR दर्ज, जानिए... यह FIR से कितना होता है अलग?

 प्रवेश वर्मा के खिलाफ NCR दर्ज, जानिए… यह FIR से कितना होता है अलग?

प्रवेश वर्मा के खिलाफ NCR दर्ज, जानिए… यह FIR से कितना होता है अलग?
पश्चिमी दिल्ली के तिलक नगर में एक युवक को थप्पड़ मारने के विवाद में दिल्ली के पीडब्ल्यूडी (PWD) मंत्री प्रवेश वर्मा के खिलाफ दिल्ली पुलिस ने एनसीआर (NCR – Non-Cognisable Report) दर्ज की है। यह कार्रवाई भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 115 (स्वेच्छा से चोट पहुंचाना) के तहत की गई है

प्रवेश वर्मा के खिलाफ NCR दर्ज, जानिए… यह FIR से कितना होता है अलग
पश्चिमी दिल्ली के तिलक नगर में एक युवक को थप्पड़ मारने के विवाद में दिल्ली के पीडब्ल्यूडी (PWD) मंत्री प्रवेश वर्मा के खिलाफ दिल्ली पुलिस ने एनसीआर (NCR – Non-Cognisable Report) दर्ज की है। यह कार्रवाई भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 115 (स्वेच्छा से चोट पहुंचाना) के तहत की गई है। [1, 2, 3, 4]
कानूनी प्रक्रिया में NCR (असंज्ञेय रिपोर्ट) और FIR (प्रथम सूचना रिपोर्ट) के बीच का अंतर बहुत बड़ा होता है, जो पुलिस के अधिकारों और मामले की गंभीरता को तय करता है। [1, 2]
FIR और NCR में मुख्य अंतर

आधारNCR (Non-Cognisable Report)FIR (First Information Report)
अपराध की प्रकृतियह कम गंभीर या असंज्ञेय अपराधों (जैसे- मामूली मारपीट, गाली-गलौज, धमकी या छोटी-मोटी चोरी) के लिए दर्ज होती है।यह गंभीर या संज्ञेय अपराधों (जैसे- हत्या, बलात्कार, डकैती, अपहरण) के मामलों में दर्ज की जाती है।
जांच का अधिकारपुलिस के पास बिना कोर्ट/मजिस्ट्रेट की अनुमति के जांच शुरू करने का अधिकार नहीं होता है।पुलिस सूचना मिलते ही तुरंत अपनी जांच (Investigation) शुरू कर सकती है, इसके लिए कोर्ट के आदेश की जरूरत नहीं होती।
गिरफ्तारी की शक्तिपुलिस आरोपी को बिना वारंट के गिरफ्तार नहीं कर सकती।पुलिस आरोपी को बिना किसी वारंट के तुरंत हिरासत या गिरफ्त में ले सकती है।
कानूनी धारा (प्रक्रिया)यह भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 174 के तहत दर्ज की जाती है।यह संज्ञेय अपराधों की सूचना पर BNSS के नियमों के तहत दर्ज की जाती है।

इस मामले में आगे क्या होगा?
प्रवेश वर्मा के मामले में NCR दर्ज होने के कारण दिल्ली पुलिस खुद से इस मामले की तफ्तीश या उन्हें गिरफ्तार नहीं कर सकती। अगर शिकायतकर्ता मामले में आगे कार्रवाई चाहता है, तो उसे जिला मजिस्ट्रेट (Court) के पास अर्जी देनी होगी। जब मजिस्ट्रेट इस मामले में पुलिस को जांच करने की मंजूरी (आदेश) देंगे, उसके बाद ही दिल्ली पुलिस इस थप्पड़ कांड की आधिकारिक जांच शुरू कर पाएगी।

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