अक्टूबर की शुरुआत से दिल्ली की हवा में बारीक प्रदूषक कण करीब 20 प्रतिशत बढ़े और आधी रात के आसपास प्रदूषण सबसे ज्यादा दर्ज हुआ. पराली जलाने की ज्यादातर घटनाएं अभी बाकी हैं, जबकि आधिकारिक अनुमान आने वाले दिनों में भी हवा खराब रहने का संकेत दे रहा है. 
दिवाली के बाद अक्सर वायु प्रदूषण के स्तर में बढ़ोतरी देखी जाती है, लेकिन इस बार आलम ये है कि वायु गुणवत्ता पहले ही खराब श्रेणी में दर्ज की जा रही है. 21 अक्टूबर की रात जब दिल्ली के ज्यादातर लोग सो रहे थे, तब शहर के 53 में से 45 एयर मॉनिटर पर प्रदूषण का स्तर खराब या उससे भी बदतर दर्ज किया गया. केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) के आंकड़ों में यह बात सामने आई है. CPCB की रीडिंग के मुताबिक, रात 1 बजे दिल्ली में PM2.5 का औसत स्तर 191.2 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर था. यह CPCB के पैमाने पर बेहद खराब श्रेणी में आता है.
14 अक्टूबर से शुरू हुए हफ्ते में यह सबसे ज्यादा प्रदूषण वाला समय था. भारत में PM2.5 की तय सीमा पूरे दिन के औसत के हिसाब से 60 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर ह CPCB ने यह राष्ट्रीय वायु गुणवत्ता मानक 2009 में तय किया था दिल्ली की हवा की स्थिति आमतौर पर दिन के एक AQI आंकड़े से बताई जाती है. इस आंकड़े के हिसाब से देखें तो पिछले साल के मुकाबले इस अक्टूबर में हवा की स्थिति कुछ बेहतर रही है. CPCB के दैनिक बुलेटिन के मुताबिक, 20 अक्टूबर को दिल्ली का AQI 179 था, जो मध्यम श्रेणी में आता है. 1 से 20 अक्टूबर के बीच औसत… AQI 154.6 रहा, जबकि 2025 में इसी अवधि के दौरान यह 178.7 था. बुलेटिन के मुताबिक, इस अवधि में किसी भी दिन AQI खराब या उससे बदतर श्रेणी में नहीं पहुंचा.
लेकिन हर घंटे के आंकड़े देखने पर तस्वीर ज्यादा गंभीर नजर आती है. आजतक के CPCB आंकड़ों के विश्लेषण के मुताबिक, 21 अक्टूबर की रात 1 बजे तक के पिछले एक हफ्ते में दिल्ली के 59 मॉनिटर पर दर्ज PM2.5 रीडिंग में से 24.9 फीसदी खराब या उससे भी बदतर श्रेणी में थीं. दिन का औसत आंकड़ा प्रदूषण के सबसे खराब घंटों की जानकारी नहीं देता. ये अक्सर उस समय आते हैं, जब ज्यादातर लोग सो रहे होते हैं या रात की शिफ्ट में काम कर रहे होते हैं अथवा सुबह जल्दी काम कर रहे होते हैं



