लूटपाट के लिए की थी साध्वियों की हत्या
घटना के बाद शकरपुर थाने में इन हत्याओं के संबंध में भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की संबंधित धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया था। पुलिस के अनुसार, दोनों साध्वियों का गला घोंटा गया था और आरोपियों ने आश्रम से नकदी, आभूषण और अन्य कीमती सामान कथित तौर पर लूट लिया था।
कोर्ट ने 1995 को किया था भगोड़ा घोषित
पुलिस ने बताया कि वारदात के बाद से ही फरार चल रहा ललित घटना के मुख्य आरोपियों में से एक था और वह एक पीड़िता का गला घोंटने में संलिप्त था। अपराध के बाद उसे कथित तौर पर लूटी गई नकदी और आभूषणों में से हिस्सा मिला था। अधिकारियों ने कहा कि शुरुआती जांच के दौरान तीन सह-आरोपियों सुनील कुमार, दिलीप राम और सुशील को गिरफ्तार कर लिया गया था, जबकि ललित फरार रहा। पुलिस ने 26 अक्टूबर 1995 को उसे भगोड़ा घोषित किया था।
6 साल तक बिहार में छुपकर रहा
जांचकर्ताओं ने कहा कि ललित शुरू में घरेलू सहायक के रूप में काम करता था और सह-आरोपियों कुमार व राम के संपर्क में आया था। अपराध के बाद फरारी काटने के दौरान वह साल 2000 तक बिहार में रहा और उसने अलग-अलग जगहों पर काम किया, जिसके बाद वह दिल्ली वापस लौट आया था। पुलिस ने बताया कि इसके बाद वह अपने अतीत के जानकारी को छुपाते हुए अलग-अलग फैक्ट्रियों और कारखानों में पैकेजिंग मजदूर के रूप में काम करने लगा।


