2014 में सुरेंद्र कोली को फांसी होने ही वाली थी, लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने आधी रात को एक फ़ैसला सुनाकर उसकी फांसी पर रोक लगा दी. लगभग 19 साल जेल में रहने के बाद उसे सभी आरोपों से बरी कर दिया गया, लेकिन आज़ाद होने के एक साल से भी कम समय बाद वह हरिद्वार में अपनी चाय की दुकान पर लटका हुआ मिला.

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